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"आसमानी मोहब्बत ..." एक भावनात्मक नज़्म

  
A breathtaking view of lush green hills and majestic mountains under a dramatic cloudscape — मनमोहक हरियाली और पर्वतों का दृश्य, बादलों की छांव में

मेरे द्वारा ली गई तस्वीर तीन वर्ष पूर्व की है ।
यह तस्वीर देखकर मेरे मन में कुछ जज्बात आए, जिन्हें मै अपनी लेखनी के माध्यम से, शब्दों के ताने बाने में पिरो कर आपके सामने रख रहा हूं...

                 "आसमानी मोहब्बत"

ऊपर वाले की मोहब्बत, नीले साए में लिपटी हुई

सितारों की तरह चमकती, ज़मी से कुछ कहती नहीं


दिल से आया था नीचे, लेके मोहब्बत के बादलों का हार 
ढेर सारी दुआओं के साथ, जैसे रहा उसकी नज़रें उतार 

चाहता था वो उसको छूना, पर ज़मीं थी कुछ उदास
वो खामोशी से खो बैठी थी, अपनी होश ओ हवास 

मोहब्बत पाने को चले थे, हवा में उड़ते ख्वाबों के साथ,  
पर हर कदम पर दूरी बढ़ती गई, दिल रहा खाली हाथ 

वो आसमाँ से आया तो था, पर जमीनी सच से अंजान 
यहां मोहब्बत जज़्बा नहीं, एक जंग है और एक पहचान

अब वो मोहब्बत दूर एक तारा बनकर टिमटिमा रहा है,  
ज़मीं पर है "राज" छुपे छुपे, बेबस खुद को ढूंढ रहा है।

मनोज भट्ट कानपुर          26 अक्टूबर 2025
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