सास-बहू संबंध और बेटियों की परवरिश : रिश्तों की जड़ों में छिपा सामाजिक सच क्या कभी आपने सोचा है जो बच्चियां, जो बेटियां अपने घर में, शादी से पूर्व तमाम खूबियों से परिपूर्ण, घर की रौनक, घर में खुशहाल माहौल बनाने वाली और सब की प्यारी दुलारी होती हैं, वही जब शादी के बाद अपने ससुराल में जाती हैं तो अचानक वहां से उनकी तमाम कमियां बताई जाने लगती हैं। उसी बेटी की तमाम बुराइयां बताई जाने लगती हैं, खासकर सास के साथ सामंजस्य न बैठाने वाली या यूं कहें कि संघर्ष की बातें सामने आने लगती है और फिर धीरे धीरे सही और गलत के संघर्ष में दोनों परिवार उलझ कर रह जाते हैं। तो ऐसा क्यों होता है कि अचानक अच्छी खासी बेटियां, बदनाम बहू बन जाती हैं। तो चलिए एक नए नजरिए से इस विषय पर विचार करें कि आखिर ऐसा क्यों होता है। इस बहुचर्चित विषय पर अपने विचार आपके सामने रखने की कोशिश है। हो सकता है इसमें कुछ सुधार की संभावना हो तो अपनी टिप्पणी अवश्य भेजें। भारतीय समाज में परिवारिक संबंधों की जटिलता और गहराई, सदियों से चर्चा का विषय रही ...
सामाजिक ताना-बाना - मनोज भट्ट कानपुर के ब्लॉग पर परिवार, रिश्ते, समाज और जीवन से जुड़े गहरे विचारशील लेख। वास्तविक अनुभवों के साथ समाज को बेहतर समझने का सफर।