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आनंद ही जीवन का महामंत्र

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.                                    आनंद ही जीवन का महामंत्र....      मनुष्य परमात्मा की सर्वोत्तम कृति कहलाता है, लेकिन मनुष्य स्वयं मानता है कि वह परमात्मा की सबसे बड़ी भूल है। यही भ्रम उसे जीवन में लगातार एक ही लक्ष्य की ओर धकेलता है, वो है "आनंद" ।     आनंद की परिभाषा उतनी ही उलझी हुई है जितनी गणित की किताब। हर किताब में अलग, हर शिक्षक के हिसाब से उसका उल्टा।      लेकिन दुनिया के सभी महान विचारक, ऋषि, वैज्ञानिक, बाबाजी, यूट्यूबर, रील क्रिएटर, कोच, मोटिवेशनल वकता और नुक्कड़ पर बैठा चायवाला, सभी एक ही बात पर सहमत हैं... कि “आनंद लेना चाहिए… चाहे किसी भी तरीके से लेना पड़े।”      यूँ तो आनंद प्राप्त करने के अनगिनत रास्ते हैं, किंतु संक्षेप में कुछ रास्ते,जो आम से है, उन पर प्रकाश डाल रहा हूँ। इसके अलावा बाकी आप भी बहुत से अन्य रास्तों से परिचित होंगे, जो शायद आपके घर से या आसपास से गुजरते होंगे...  1-- बिस्तर का आनंद बिस्तर पर पड़े ...