संदेश

हास्य व व्यंग्य लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

"मजा" की खोज: बचपन से आज तक का सफ़र

चित्र
  "मजा" की खोज, बचपन से आज तक का सफ़र”  (एक विस्तृत, हास्य-व्यंग्यात्मक, भावपूर्ण और सभी आयु वर्ग के लिए उपयुक्त कथा) पहला दृश्य - वर्तमान समय का ‘अत्याधुनिक’ घर शहर के एक पॉश इलाके में “मनोहर निवास” नाम का एक आधुनिक घर था। और इसमें रहते थे.... दादा जी - (गंगाराम जी): उम्र 72, दिल से 18... बेटा – महेश: आधुनिकता में विश्वास रखने वाला... बहू – कविता: सुविधा की देवी... पोता – आरव: मोबाइल गेम्स का महायोद्धा... एक दिन रविवार की सुबह सभी अपने-अपने कमरों से धीरे-धीरे बाहर निकले, जैसे थके हुए राक्षस एक रात पहले भारी युद्ध लड़कर उठते हैं। दादा जी पहले से ही सोफे पर बैठे थे। हाथ में अख़बार, बगल में चश्मा और सामने 65 इंच की LED टीवी, लेकिन चालू नहीं। महेश: (खिंचाई करते हुए) “पापा! टीवी क्यों नहीं चला लेते ?इतनी बड़ी स्क्रीन है… 4K… डॉल्बी साउंड… दुनिया का हर चैनल!” दादा: (हंसकर) “बेटा, इतना बड़ा टीवी... हम ने बचपन में तो सिनेमा हॉल भी नहीं देखा था। अब रोज़ घर में फिलम देखूं तो उसका उत्साह कैसा ?” और आरव अपने मोबाइल पर PUBG के नए संस्करण में व्यस्त था। उसकी नज़र स्क्रीन से उठकर किसी इंसा...