उद्देश्य से भटकती सोशल मीडिया "ग्रुप्स" : एक चिंतन
उद्देश्य से भटकती सोशल मीडिया"ग्रुप्स" (एक सामाजिक चिंतन...) आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने संवाद, अभिव्यक्ति और सामाजिक जुड़ाव के नए द्वार खोल दिए हैं। विशेष रूप से " ग्रुप्स ", चाहे वे व्हाट्सएप, फेसबुक, टेलीग्राम या अन्य प्लेटफॉर्म्स पर हों। शुरुआत में तो ये ग्रुप्स, सामाजिक जागरूकता, ज्ञान-विज्ञान का विनिमय और भावनात्मक जुड़ाव के सशक्त माध्यम थे। परंतु समय के साथ इनकी संरचना और उद्देश्य में निम्न स्तर तक की गिरावट दिखती है। परिवारिक और सामाजिक ताना-बाना के लिए चेतावनी भी। जो "डिजिटल संस्कृति" की गिरती गुणवत्ता का संकेत तो देता ही है, साथ ही हमारी "मूल सामाजिक संस्कृति" के प्रति चिंताजनक भी है। प्रारंभिक उद्देश्य: संवाद और समरसता अधिकांश सोशल मीडिया ग्रुप्स की शुरुआत किसी सकारात्मक उद्देश्य से होती है, जिसका उद्देश्य.... प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, तकनीकी सहायता, साहित्यिक विमर्श आदि पर ज्ञान साझा करना। पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा या सामाजिक सुधार से जुड़े विषय में साम...