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स्वार्थ और लालच से बिखरता सामाजिक ताना-बाना:

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  स्वार्थ और लालच से बिखरता सामाजिक ताना-बाना... वर्तमान की चुनौती और आगामी पीढ़ी की विरासत... आज का युग भौतिक सुख-सुविधाओं का युग है। हर तरफ चमक-दमक, तेज गति, तुरंत सफलता और कम से कम मेहनत में अधिक से अधिक हैसियत पाने की होड़ मची हुई है। लेकिन इसी होड़ ने हमारे सामाजिक ताने-बाने को चुपचाप चीरना शुरू कर दिया है।  जहां एक समय परिवार, समाज और राष्ट्र एक-दूसरे के सहारे खड़े थे, वहां आज स्वार्थ और लालच की दीवारें हर संबंध को अलग-अलग कर रही हैं। यह कोई अचानक आई आपदा नहीं है। यह धीरे-धीरे, लगभग अनदेखी तरीके से फैल रही एक महामारी है जिसका नाम है – लालच और स्वार्थ... हम भौतिकवाद की चकाचौंध में इतने खो गए हैं कि भविष्य की पीढ़ी क्या विरासत पाएगी, इसकी चिंता हमें छू तक नहीं रही। हम अपने लालच में इतने अंधे हो चुके हैं कि परिवार टूट रहा है, दोस्ती बिक रही है, समाज का विश्वास डगमगा रहा है और देश की नैतिक नींव हिल रही है।  यह लेख इसी टूटते सामाजिक ढांचे की पड़ताल करता है, उसके कारण, उसके वर्तमान स्वरूप, उसके दूरगामी परिणाम और सबसे महत्वपूर्ण, हम क्या कर सकते हैं ताकि हम अपनी आने वाली प...