गुस्सा, एकांत और बेचारा पति
गुस्सा, एकांत और बेचारा पति:.... (एक विस्तृत पारिवारिक हास्य-व्यंग्य कथा) दार्शनिक का परिचय हमारे मोहल्ले में एक ऐसे दार्शनिक रहते थे, जिनका नाम सुनते ही लोग हंसने लगते थे, श्री हरिशंकर पंडित ‘अनुभवी’। अब ‘अनुभवी’ नाम कैसे पड़ा, यह एक अलग कहानी है, लेकिन संक्षेप में कहें तो उन्होंने शादी के 25 साल पूरे कर लिए थे, और वह भी जीवित अवस्था में... जी हां, जीवित! क्योंकि शादी के बाद कई पुरुषों की आत्मा तो पहले ही दफन हो जाती है, लेकिन पंडित जी की आत्मा न सिर्फ जीवित थी, बल्कि वह मोहल्ले के हर नये दूल्हे को जीवन का मंत्र देने के लिए तैयार रहती थी।एक "अनुभवी आत्मा"... लोग कहते थे, “पीएचडी कर लो, आईएएस बन जाओ, योग गुरु बन जाओ, पर पंडित जी कहते थे कि असली योग्यता चाहिए तो 20 साल शादी निभाओ।” पंडित जी फिर कहते कि "जिसने शादी के दो दशक पूरे कर लिए,वो ठसक से जीवन जीता है।" पंडित जी ने एक फिलॉसफर की तरह जीवन का एक महान सिद्धांत खोजा था, जो वे हर शादीशुदा जोड़े को मुफ्त में बांटते थे। वह सिद्धांत था: “ पुरुष गुस्से में एकांत ढूंढता है…लेकिन स्त्री गुस्से में पति ढूंढती है ।” प...