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घर से संवाद...(लड़कियों की किशोरावस्था--भाग-3)

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घर से संवाद...चुप्पी तोड़ने की हिम्मत (लड़कियों की किशोरावस्था--भाग-3) चुप्पी तोड़ने की हिम्मत अपने ही आँगन में अनकही रह जाने वाली बातें परिवार के सभी सदस्यों के लिए घर वह जगह होनी चाहिए जहाँ मन बिना डर के खुल सके, जहाँ सवालों को अपराध न माना जाए, जहाँ गलती करने पर संबंध टूटते नहीं बल्कि समझ बढ़ती है।  लेकिन विडंबना ये है कि किशोरावस्था में अक्सर ऐसा होता है कि जिस घर को सबसे सुरक्षित जगह होना चाहिए, वहीं अपनी बात कहने में सबसे अधिक झिझक महसूस होने लगती है। एक किशोरी दिन भर स्कूल, दोस्तों, सोशल मीडिया और समाज के बीच अपनी पहचान सँभालती है, पर जब घर लौटती है तो कई बार अपने ही भावनाओं को छुपा लेती है। वह सोचती है, "मम्मी-पापा समझेंगे नहीं।"  "कहूँगी तो डाँट पड़ेगी।" या  "मेरी बात को हल्के में ले लिया जाएगा।" धीरे-धीरे यही सोच चुप्पी में बदल जाती है और यह चुप्पी केवल शब्दों की ही नहीं होती बल्कि यह आत्मविश्वास, भरोसे और रिश्तों की भी चुप्पी होती है। यह लेख उसी चुप्पी को समझने, उसकी जड़ों को पहचानने और संवाद की ओर साहसिक कदम बढ़ाने की प्रक्रिया पर केंद्रित है। ...

समाज और परिवार में संवाद का क्षय

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परिवार और समाज में राजनीतिक बहस संवादहीनता का संकट और सामाजिक पुनरुत्थान का मार्ग.... लगभग तीन दशक पूर्व, भारतीय घरों की बैठकें और समाज की गोष्ठियाँ विचारों का जीवंत केन्द्र हुआ करती थीं। शाम ढलते ही चाय की केतली चूल्हे पर चढ़ती, और लोग धर्म, शिक्षा, संस्कृति, नैतिक मूल्यों तथा जीवन की गहराइयों पर चर्चा करते।  बच्चे, बुजुर्गों के पैर छूते, उनकी कहानियाँ सुनते; महिलाएँ घर-गृहस्थी के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों में अपनी भूमिका निभातीं। असहमति होती, लेकिन गरिमा के साथ। संवाद में संवेदना होती, सहमति में उत्साह और असहमति में भी सम्मान। वह समय था जब परिवार एक जीवित इकाई था न कि विवाद-कक्ष। समाज एक बुनाव था, न कि टूटे तारों का ढेर। किंतु धीरे-धीरे, जैसे-जैसे टेलीविजन, सोशल मीडिया और 24×7 न्यूज़ चैनलों का वर्चस्व बढ़ा, “राजनीति” ने संवाद के सिंहासन पर कब्जा कर लिया। आज सुबह की चाय से लेकर रात के भोजन तक, हर मेज पर वही एक विषय घूमता है, राजनीति।  बेरोजगारी, शिक्षा की बदहाली, स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियाँ, ग्रामीण-नगरीय असंतुलन जैसे वास्तविक सामाजिक मुद्दे चर्चा से गायब हो चुके हैं। परिवारि...