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बेटे के नाम, अंतिम पत्र

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वृद्धाश्रम से, एक मां की साँसों में बसी आख़िरी पुकार... गायत्री भट्ट , सह-संपादक मनोज भट्ट , मूल लेखक कानपुर तिथि: १० अक्टूबर २०२५ बेटे के नाम, एक पत्र...(अंतिम) यह केवल एक पत्र नहीं है। यह एक मां की अधूरी सांसों में बसी वह पुकार है, जो... बेटे के हृदय तक पहुँचना चाहती है। यह एक ऐसी आवाज़ है, जो हर उस बेटे को झकझोरती है, जिसने समय की आपाधापी में मां की गोद को पीछे छोड़ दिया।        यह व्यथा उस मां की है, जो वृद्धाश्रम की दीवारों के बीच बेटे की आहट ढूंढती रही और अंततः एक पत्र में अपनी आत्मा समेट कर उसे भेज दिया... वृद्धाश्रम की खामोशी      शारदा देवी, उम्र लगभग अस्सी वर्ष। एक वृद्धाश्रम के छोटे से कमरे में रहती थीं। जहां खिड़की से धूप तो आती थी, पर बेटे की आहट नहीं। दीवारों पर कुछ तस्वीरें थीं, एक में राहुल गोद में बैठा मुस्कुरा रहा था, दूसरी में उसकी शादी की तस्वीर, जिसमें शारदा देवी ने गोटे वाली साड़ी पहनी थी। वही साड़ी अब भी अलमारी में रखी थी, जैसे किसी त्यौहार की प्रतीक्षा में...     ...