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चप्पल की व्यथा, गाँव की पंचायत की अनोखी सुनवाई

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  " एक अनोखी पंचायत जहाँ इंसान नहीं, चप्पल ने दिखाया समाज को आईना"      कल रात को अचानक गांव से फोन आया कि गुड्डू भैया बहुत गंभीर समस्या है, पंचायत बैठी है। और जब हमने पूछा, "का हुआ ?"... जवाब मिला..."कुछ पूछौ ना, सुबह जल्दी तुम्हे आय का है बस ,बहुत जरूरी है"। पत्नी बोली , "का हुआ ?" हमने कहा, लगता है कि कोई मामला बड़ा गंभीर है।"        रात भर मैं सो नहीं पाया और सुबह जल्दी उठकर गांव की ओर चल दिया। गांव भी करीब आ गया, गांव के बाहर से ही गहमा गहमी का एहसास होने लगा। फिर  जैसे ही अपने गांव में प्रवेश किया, भीड़ से पूछा कि काहे की भीड़ है तो कारण बड़ा अजीब पता चला,  “ चप्पल महोदय की जनहित याचिका"         अपने बड़बक पुरवा गांव की पंचायत भवन में आज खास बैठक बुलाई गई थी। भवन के बाहर ढोल-नगाड़े बज रहे थे। अंदर मंच पर चौधरी कालूराम ताव से बैठे थे, मानो खुद मुख्य न्यायाधीश हों, जैसे ही हमें देखा, जोर से चिल्ला कर बोले, आओ आओ गुड्डू भैया, यहां बगल में बैठो और एक कुर्सी में मुझे बैठा दिया। मेरे  बगल में गांव का सचिव कल्लू, ह...