वक्त की पुकार
"वक्त की पुकार"... The Call of Time... For the Youth वक्त एक ऐसी शक्ति है जो दिखाई नहीं देती, पर हर बदलाव की नींव उसी पर टिकी होती है। वह न बोलता है, न चलता है, न लड़ता है, लेकिन हर आंदोलन, हर विचार, हर निर्माण उसी की प्रेरणा से जन्म लेता है। यह कविता युवा पीढ़ी को, उनके मौन पर, लेकिन निर्णायक शक्ति की याद दिलाती है, जो उन्हें जिम्मेदारी, चेतना और निर्माण की ओर बुलाती है... वक्त की चाल... The Movement of Time वक्त खुद चलता नहीं, सबको चलाता है, हर मोड़ पर नया " रास्ता " दिखाता है। वो खुद तो कभी कुछ नहीं बोलता, पर तुम्हारी चुप्पी में, " शोर " बन जाता है। वो अपने लिए, कभी लिखता नहीं, पर तुम्हारे कर्मों से " इतिहास" बनाता है। वक्त की आंखें नहीं, वो देखता नहीं, पर तुम्हारी आँखों में " सपने" सजाता है। वक्त का पाठ ... The Lessons of Time वो स्व...