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माता-पिता का सम्मान क्यों जरूरी है? | बुजुर्गों की देखभाल और परिवार की जिम्मेदारी

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साथ चलती उम्र की कहानी ... (बुजुर्ग माता-पिता पार्क में बैठे हुए – सम्मान और अपनापन की तलाश में) आज के समय में बुजुर्ग माता-पिता का सम्मान और उनकी देखभाल केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और मानवीय मूल्यों का आधार है। यह लेख परिवार, समाज और रिश्तों की सच्चाई को उजागर करता है। यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक विषय बन गया है, माता-पिता वो दीवार है जो कभी नहीं गिरती, लेकिन जिसे हम भूल जाते हैं। ध्यान रखे कि जब कोई शिशु अपनी माँ की गोद में पहली बार आँखें खोलता है, तो दुनिया का सबसे पहला स्पर्श उसकी माँ की उँगलियों का होता है। वो नरम, गर्म, और बिना किसी शर्त का स्पर्श।  पिता, अपना हाथ उसकी पीठ पर रखकर उसे सहारा देता है वो सहारा जो जीवन भर चलता है। माँ-पिता उन दीवारों की तरह होते हैं जो तूफान में भी बच्चों को ढककर रखते हैं। कोई शोर और कोई आँधी उन्हें कभी हिला नहीं पाती। लेकिन... समय नाम का वो चोर, धीरे-धीरे सब बदल देता है। बचपन की यादें कितनी मीठी होती हैं, और कितनी कड़वी भी। रात के दो बजे माँ जाग रही है। बच्चे को बुखार चढ़ा हुआ है। माथे पर ठंडी पट्टी रखती हुई वो खुद थक चुकी है, लेकि...

“रिटर्न गिफ्ट की परंपरा बनाम भावनाओं की गरिमा: एक आवश्यक सामाजिक विचार”

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रिटर्न गिफ्ट की चकाचौंध में दम तोड़ती सामाजिक संवेदनाएँ... उपहार या व्यापार ?" (एक आवश्यक एवम् ज्वलंत सामाजिक विचार)   परंपरा का आधुनिक विरूपण भारतीय संस्कृति में 'अतिथि' को ईश्वर का रूप माना गया है। हमारे संस्कारों में भेंट या उपहार देना 'त्याग' और 'समर्पण' का प्रतीक था। प्राचीन काल में जब कोई अतिथि घर आता था, तो विदा होते समय उसे कुछ फल, मिठाई या वस्त्र भेंट करना इस बात का प्रतीक था कि मेजबान के मन में उसके प्रति अगाध प्रेम है।  परंतु, आज के उपभोक्तावादी युग में इस सुंदर परंपरा का स्वरूप विकृत हो चुका है। 'रिटर्न गिफ्ट' (Return Gift) के नाम पर एक ऐसी व्यवस्था खड़ी कर दी गई है, जो आत्मीयता की जड़ों में मट्ठा डाल रही है। यह लेख केवल एक विचार नहीं, बल्कि उस बढ़ती हुई सामाजिक बीमारी का एक्सरे है, जो हमारे रिश्तों को भीतर से खोखला कर रही है। 1. ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में  भारतीय दर्शन हमेशा से "देने" पर केंद्रित रहा है, न कि "बदले में पाने" पर। हमारे शास्त्रों में आवश्यकता से अधिक संचय न करना और 'दान' के महत्व को समझाया गया है। ...