"गरीब और अमीर", दुनिया में दो ही जाति और धर्म

"गरीब और अमीर", दुनिया में दो ही जाति और धर्म....

गरीब और अमीर के बीच विभाजन को दर्शाने वाला रंगीन क्षैतिज चित्र, बाईं ओर संघर्षपूर्ण गरीबी का दृश्य, दाईं ओर समृद्धि का दृश्य, बीच में प्रकाश का पुल और हाथ मिलाते हुए, शीर्षक गरीब और अमीर: दुनिया में दो ही जाति और धर्म तथा चित्र परिकल्पना एवं लेख मनोज कुमार भट्ट कानपुर








आज की दुनिया में बस, दो ही जाति और धरम !
नए नजरिए से देखिए, तो दूर हो जाएगा भरम  !!

अपना परंपरागत रूढ़िवादी चश्मा उतार कर फेंक दीजिए और नए सिरे से, नए नजरिए का साफ चश्मा पहन कर अपने अगल बगल से लेकर दुनिया भर को देखिए तो आपको मेरी उपरोक्त दो पंक्तियों का संदेश स्पष्ट दिखने लगेगा। यदि अभी भी कुछ धुंधला दिख रहा है, तो पूरा लेख अवश्य पढ़ें...

दरअसल दुनिया भर का मानव समाज अनगिनत जातियों, धर्म, भाषाओं और रंगबिरंगी संस्कृतियों से भरा हुआ हैं। लोग अलग-अलग देशों में रहते हैं, अलग-अलग रीति-रिवाजों को मानते हैं। लेकिन अगर हम गहराई से देखें तो सच्चाई यह है कि मानव समाज वास्तव में सिर्फ दो हिस्सों में बंटा हुआ है, गरीब और अमीर।

यह विभाजन न किसी देश की सीमा से जुड़ा है, न किसी रंग या भाषा से। यह वह रेखा है जो हर इंसान के जीवन को सबसे गहरे स्तर पर छूती है। यह लेख इसी सच्चाई को सरल शब्दों में समझाने की कोशिश करता है। हम देखेंगे कि यह फर्क क्या है, यह कैसे पैदा होता है, इसका असर क्या है और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न ये है कि इसे कैसे मिटाया जा सकता है ?

सबसे पहले समझते हैं कि गरीब जीवन क्या है ...

गरीब वह इंसान है जिसके पास रोज की रोटी का भरोसा नहीं होता। सुबह उठते ही उसकी चिंता शुरू हो जाती है, आज खाना कैसे जुटाएंगे, बच्चों को स्कूल भेज पाएंगे या नहीं, बीमारी आई तो दवा कहां से लाएंगे।

गरीब का जीवन एक लगातार लड़ाई है। वह खेत में काम करता है, कारखाने में मजदूरी करता है, सड़क पर फल बेचता है या शहरों में छोटी-छोटी दुकानों पर काम करता है। उसके हाथों में मेहनत की लकीरें होती हैं, लेकिन उसके पास आराम का समय नहीं होता।

गरीब बच्चे स्कूल जाते हैं तो किताबें नहीं होतीं, भूख के मारे पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगता। गरीब मां-बाप अपने बच्चों को पालने के लिए दिन-रात एक करते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें अच्छा भोजन, साफ कपड़े या खेलने का मैदान नहीं दे पाते।

बीमारी आती है तो अस्पताल जाने की हिम्मत नहीं होती क्योंकि खर्च का डर सताता है। गरीब परिवार में खुशी के मौके भी कम होते हैं। शादी-ब्याह, त्योहार सब कुछ साधारण तरीके से मनाए जाते हैं क्योंकि ज्यादा खर्च नहीं उठाया जा सकता।

दुनिया के हर कोने में ऐसे गरीब लोग हैं। अफ्रीका के गांवों में, एशिया के शहरों की झुग्गियों में, लैटिन अमेरिका के बस्तियों में और यूरोप के कुछ हिस्सों में भी। वे अलग-अलग भाषाएं बोलते हैं, अलग-अलग देवताओं की पूजा करते हैं, लेकिन उनकी कहानी एक ही है, संघर्ष। वे सपने देखते हैं, लेकिन सपनों को पूरा करने के साधन उनके पास नहीं होते।

अब समझते हैं कि अमीर जीवन क्या है ...

अमीर जीवन की बात करें तो अमीर वह है जिसके पास सब कुछ आसानी से उपलब्ध है। उसके पास बड़ा घर, अच्छी गाड़ी, स्वादिष्ट खाना, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं हैं। अमीर व्यक्ति के बच्चे अच्छे स्कूलों में पढ़ते हैं, जहां टीचर ध्यान देते हैं, जहां किताबें, कंप्यूटर और खेल के सामान सब उपलब्ध होते हैं। 

अमीर परिवार में बीमारी आने पर तुरंत अच्छा डॉक्टर और अस्पताल मिल जाता है जिससे उनका अच्छे से अच्छा इलाज हो जाता है। उनके पास छुट्टियां मनाने, नई चीजें खरीदने और भविष्य की योजना बनाने का समय और संसाधन दोनों होते हैं।

अमीरों का जीवन सुविधाओं और सम्पन्नताओं का उत्सव है। वे यात्राएं करते हैं, नई संस्कृतियों को जानते हैं, अच्छे रेस्तरां में खाना खाते हैं और अपने बच्चों के लिए बेहतर भविष्य बना देते हैं। लेकिन इस सुविधा के साथ कभी-कभी अहंकार भी आ जाता है। 

वे सोचने लगते हैं कि उनकी सफलता सिर्फ उनकी मेहनत का नतीजा है, जबकि असल में कई बार अवसरों ने उन्हें आगे बढ़ाया होता है। अमीर व्यक्ति के पास पैसा होने से उसकी आवाज ज्यादा सुनी जाती है। सरकारें, नेता और समाज उन्हें ज्यादा महत्व देते हैं।

यह फर्क सिर्फ पैसे का नहीं है। यह सोच का फर्क है। गरीब अक्सर सोचता है कि उसका जीवन बस यही है,  संघर्ष। वह जोखिम नहीं ले पाता क्योंकि एक गलती पूरे परिवार को भूखा रख सकती है। गरीब का स्वास्थ्य कमजोर रहता है क्योंकि अच्छा खाना और आराम नहीं मिलता।

वहीं अमीर जोखिम ले सकता है क्योंकि उसके पास आर्थिक सुरक्षा का जाल होता है। अधिकांश लोगों का अमीर का स्वास्थ्य अच्छा रहता है क्योंकि वह अच्छा खा सकता है। बीमारी पर नियमित चेकअप करवा सकता है, व्यायाम कर सकता है और तनाव कम कर सकता है।

शिक्षा का फर्क, दोनों के दरम्यान में भी गहरा हो जाता है। गरीब का बच्चा अक्सर बीच में ही स्कूल छोड़ देता है क्योंकि वह घर के कामों में मदद करता है या पैसे की कमी की वजह से बीच में हो पढ़ाई छूट जाती है। और वे बुनियादी पढ़ाई तक सीमित रह जाते हैं। और इस तरह गरीब का बच्चा गरीब ही रह जाता है। 

जबकि वहीं अमीर के बच्चे, अच्छे कॉलेजों में जाते हैं, उच्च मानक की शिक्षा प्राप्त करते हैं, नए नए स्किल्स सीखते हैं और उच्च पद प्राप्त करने के लिए दुनिया भर के अवसरों का फायदा उठाते हैं। इससे अगली पीढ़ी में फर्क और बढ़ जाता है। इस तरह अमीर का बच्चा और भी अमीर बनता जाता है।

स्वास्थ्य का फर्क, भी इसी तरह है। गरीब इलाकों में साफ पानी, साफ हवा, अच्छा खाना नहीं मिलता। जिससे एक छोटी सी भी बीमारी गरीब परिवार को कर्ज में डुबो सकती है। आए दिन एक से एक नई घातक, जानलेवा बीमारियां फैलती हैं और अनगिनत गरीब उसकी चपेट में आकर, अपनी जीवन भर की मेहनत की कमाई एक झटके में गवां देते हैं, क्योंकि इलाज महंगा पड़ता है। 

और अमीर इलाकों में हर तरह की नागरिक सुविधाओं की उपलब्ध होती है। जन प्रतिनिधि भी उनकी हर से ध्यान रखते हैं। अमीरों के क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में हरियाली दिखती है। हमेशा साफ पानी की व्यवस्था होती है, सफाई व्यवस्था चाक चौबंद रहती है। तो ऐसे में वहां कोई बड़ी बीमारी नहीं फैलती है, यदि फिर भी कोई अमीर बीमार होता है तो उनके लिए वह मामूली बात है।

सम्मान का फर्क, पूरे समाज के हर वर्ग द्वारा गरीब और अमीर के प्रति सम्मान का फर्क भी कम नहीं है। गरीब की बात अक्सर हर क्षेत्र में अनसुनी रह जाती है। पुलिस, अदालत या सरकारी दफ्तर में उसे इंतजार करना पड़ता है। वहीं अमीर की बात तुरंत सुनी जाती है। क्या कि समाज का नजरिया गरीब को कमजोर समझता है और अमीर को शक्तिशाली। इसीलिए यह भेदभाव वाला नजरिया ही इंसानियत को चोट पहुंचाता है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह विभाजन हमेशा का है और क्या इसे बदला नहीं जा सकता ? जवाब है, बिल्कुल बदला जा सकता है, यह स्थायी नहीं है। यह मानव निर्मित है। इंसान ने ही समाज की ऐसी व्यवस्था बनाई है जहां कुछ लोगों को ज्यादा अवसर मिल जाते हैं और कुछ को कम। इसलिए इंसान ही इस व्यवस्था को बदल भी सकता है।

इस बदलाव की सबसे बड़ी कुंजी है, शिक्षा। यदि हर बच्चे को अच्छी, मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले तो वह अपनी किस्मत खुद लिख सकता है। शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि सोचने की शक्ति, स्किल्स और आत्मविश्वास भी देती है। 

दुनिया भर में ऐसे कई उदाहरण सामने आते रहते हैं जहां गरीब परिवारों के बच्चों को अगर अच्छी शिक्षा की सुविधा मिली तो, वही बच्चे अपने परिवार को ऊंचा उठाने में सफल होते हैं। तब वह एक शिक्षित व्यक्ति न सिर्फ खुद आगे बढ़ाता है बल्कि अपने परिवार और समाज को भी आगे ले जाता है।

गरीब और अमीर दोनों को समान अवसर मिले , यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। सामाजिक और राजनैतिक दृष्टिकोण से हर व्यक्ति की यह नैतिक जिम्मेदारी होती है कि एक ऐसे आदर्श समाज की रचना हो जिसमें दोनों को हर क्षेत्र में समान अवसर मिले। खासकर उन गरीबों को, जो अब तक अवसरों से वंचित रहे हैं। 

ताकि वह अपनी मेहनत से आगे बढ़ सके। चाहे वह शहर का हो या गांव का, किसी भी जाति या धर्म का। सरकारें, समाज और अमीर लोग मिलकर ऐसे अवसर पैदा कर सकते हैं। छोटे उद्योगों को मदद, कौशल प्रशिक्षण, सस्ते ऋण और सही मार्गदर्शन गरीबों को आत्मनिर्भर बना सकते हैं।

सामाजिक न्याय इस खाई को पाटने में अहम भूमिका निभाता है। जहां अमीरों पर ज्यादा कर लगाकर गरीबों की भलाई के काम किए जाएं। जहां भूमि और संसाधनों का बंटवारा न्यायपूर्ण हो, वहां यह फर्क कम होता है। न्याय का मतलब सबको समान अधिकार देना है, न कि किसी को दबाना।

अब हम इस विचार को और गहराई से समझते हैं। गरीबी का अर्थ सिर्फ आर्थिक रूप से पैसे की कमी नहीं है। दरअसल गरीबी, अवसरों की कमी, सम्मान की कमी और उम्मीद की कमी है। जब कोई गरीब व्यक्ति रात को सोता है तो उसके मन में डर होता है, कल क्या होगा ?

इसी तरह, अमीरी का मतलब सिर्फ पैसा ही नहीं है, बल्कि पैसे के साथ ही, उनके लिए यह सुरक्षा, आजादी और विकल्पों की भरपूरता से है। क्योंकि जब अमीर व्यक्ति रात को नींद के आगोश में होता है तो उसे कल की चिंता नहीं होती, वह उस वक्त, भविष्य की योजनाएं बनाता है।

इस तरह से, नए नजरिए के नए चश्मे से जब हम देखते हैं तो यह स्पष्ट नजर आता है कि दुनिया भर में यह फर्क अलग-अलग रूपों में है। कुछ जगहों पर यह शहर और गांव के बीच है। शहर में अमीरी ज्यादा दिखती है और गांव में गरीबी। कहीं किसी क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर ही गरीबी और अमीरी का अंतर पैदा होता है।

कुछ जगहों पर यह पुरुष और महिला के बीच है, जहां महिलाओं को भेदभाव का सामना करना पड़ता है और उन्हें कम अवसर मिलते हैं। कुछ जगहों पर यह धर्म या जाति के नाम पर है, लेकिन उपरोक्त तथ्यों पर यदि विचार किया जाए तो, जड़ में वही अमीर-गरीब का फर्क ही काम करता है।

कल्पना कीजिए एक गरीब किसान की

वह सुबह से शाम तक खेत जोतता है। उसकी परेशानियों को समझिए कि बारिश न हो तो फसल सूख जाती है और ज्यादा बारिश हो जाए तो बाढ़ आ जाती है। ना जाने कितनी आकस्मिक परेशानियां उसे शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ कर रख देती है फिर भी उसे कर्ज चुकाना होता है। 

उसके बच्चे स्कूल जाते हैं लेकिन कई बार किताबें नहीं खरीद पाते। दुर्भाग्य से परिवार में कोई लाइलाज बड़ी बीमारी गले पड़ जाए तो उसकी सारी जमा पूंजी चली जाती है। उसका आधार कमजोर हो जाता है। उसकी जिंदगी एक चक्रव्यूह जैसी हो जाती है, जिसमें से निकलना मुश्किल हो जाता है।

दूसरी ओर एक अमीर व्यापारी की कल्पना कीजिए

उसके पास कई दुकानें हैं, विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक निवेश है इसलिए बाजार जब ऊपर-नीचे होता है तो  उसके पास बैकअप होने के कारण, कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह अपने बच्चों को विदेश भेज सकता है पढ़ने। परिवार घूमने जा सकता है। उसकी जिंदगी आराम और विकास की है।

इस तरह इन दोनों के बीच की बढ़ती खाई, पूरे समाज को कमजोर करती है। जब आधा समाज संघर्ष कर रहा हो तो पूरा देश आगे नहीं बढ़ सकता। क्योंकि गरीबी ही अपराध, असंतोष और अस्थिरता पैदा करती है। उस पर अमीरी यदि अहंकारी हो जाए तो वह समाज से दूर हो जाती है। दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं।

सच्चा समाधान क्या है ? 

सच्चा समाधान सहयोग है। अमीरों को समझना होगा कि आज उनकी सफलता सिर्फ अकेले उनकी नहीं है। गरीब समाज ने भी उन्हें अवसर दिए हैं। इसलिए उनके प्रति उन्हें उदार बनना चाहिए। उदारता का ये मतलब नहीं है आर्थिक दान दिया जाए बल्कि समय, ज्ञान और अवसर साझा करने का होना चाहिए। 

अमीर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है कि गरीबों के बच्चों के लिए निःशुल्क या बहुत कम कीमत पर अच्छी शिक्षा की व्यवस्था करे ताकि सभी बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित हो सके। वह गरीब समाज के छोटे उद्यमियों को भी मार्गदर्शन दे सकता है, सामाजिक कामों में हिस्सा ले सकता है।

गरीबों को भी अपनी ताकत समझनी होगी। मेहनत, एकजुटता और सीखने की इच्छा उनके सबसे बड़े हथियार हैं। वे मिलकर अपनी आवाज उठा सकते हैं, सही नीतियों की मांग कर सकते हैं और खुद को बदल सकते हैं। एक बार उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव बन जाए तो हमारा सामाजिक ताना-बाना तो मजबूत होगा ही, निश्चय ही हमारा राष्ट्र विश्व को नई दिशा देगा।

शिक्षा के अलावा स्वास्थ्य और पर्यावरण भी महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। अगर हर व्यक्ति को अच्छा पर्यावरण मिले तो वह ज्यादा स्वस्थ रहेगा और ज्यादा मेहनत कर सकता है, ज्यादा सीख सकता है। क्योंकि साफ हवा और पानी से सीधा जुड़ा है स्वास्थ्य। 

गरीब लोग अक्सर प्रदूषित इलाकों में रहते हैं। साफ पर्यावरण सबके लिए फायदेमंद है, लेकिन गरीबों के लिए तो जीवन-मरण का सवाल है। मुफ्त या सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं इस दिशा में बड़ा कदम हैं। इस क्षेत्र में भी अमीर वर्ग द्वारा सहयोग, मानवता एवं प्रकृति की सबसे बड़ी मदद होगी।

अब हम इस लेख को और विस्तार दें। मानव इतिहास में हमेशा से अमीर और गरीब रहे हैं। प्राचीन काल में राजा और प्रजा थे। राजा के पास सब कुछ, प्रजा के पास कुछ भी नहीं। लेकिन कुछ राजा न्यायप्रिय थे, उन्होंने प्रजा की भलाई की। आज के समय में भी वही सिद्धांत काम करता है। जो नेता या समाज अमीर-गरीब के फर्क को कम करने की कोशिश करते हैं, वे सच्चे सेवक हैं।

एक सच्चा धर्म क्या है ? धर्म नाम का जो भी हो, उसका असली रूप इंसानियत है। जो धर्म गरीब को उठाने में मदद करता है, अमीर को उदार बनाता है और सभी को जोड़ता है, वही सच्चा धर्म है। पूजा-पाठ अच्छे हैं, लेकिन अगर वे समाज की भलाई से अलग हों तो व्यर्थ हैं।

कल्पना कीजिए ऐसी दुनिया की जहां हर बच्चे को शिक्षा मिले, हर परिवार को स्वास्थ्य सुविधा मिले, हर व्यक्ति को काम मिले। ऐसी दुनिया में न गरीब की भूख होगी, न अमीर का अहंकार। लोग मिलकर काम करेंगे, एक-दूसरे का सम्मान करेंगे।

यह कोई कोरा सपना नहीं है, यह संभव है। कई देशों ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर देकर इस फर्क को काफी कम किया है। लेकिन अभी हमारे यहां इस पर बहुत काम किया जाना बाकी है। और हम सब मिल कर इसमें काम कर सकते। देर होने से पहले हमे तो करना ही होगा, अपनी आगामी पीढ़ी के लिए।

हर व्यक्ति कुछ न कुछ कर सकता है

अमीर और गरीब की खाई को पाटने के लिए समाज के हर वर्ग को एक अभियान या एक सामाजिक आंदोलन की तरह शुरुआत करना होगा और अपने साथ अपनी नई पीढ़ी को भी सक्रिय रूप से इसमें शामिल करना होगा। साथ ही इसमें हमारी सरकारों और सभी राजनैतिक दलों को, राजनैतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर मतैक्य होकर देश हित में काम करना होगा।

उदाहरण के तौर पर जैसे शिक्षक गरीब बच्चों को अतिरिक्त समय दे सकते हैं। डॉक्टर सस्ते क्लिनिक चला सकते हैं। व्यापारी, गरीब युवाओं को ट्रेनिंग दे सकते हैं। आम आदमी की भी जिम्मेदारी है कि वोट देते समय उन उम्मीदवारों को चुने जो गरीबी हटाने की बात करते हैं। छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़ा बदलाव लाते हैं।

गरीबों की कहानियां सुनिए। वे सिखाती हैं कि उम्मीद कभी मत छोड़नी चाहिए। अमीरों की सफलताएं देखिए, वे सिखाती हैं कि अवसरों का सही इस्तेमाल कैसे करें। दोनों को मिलकर आगे बढ़ना है। तभी हमारा सामाजिक ताना-बाना मजबूत होगा।

अमीर और गरीब समाज का विभाजन न सिर्फ सभी के व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है बल्कि पूरे विश्व को प्रभावित करता है। जब गरीबी बढ़ती है तो हिंसा, प्रवासन और असंतुलन बढ़ता है। जब अमीरी बढ़ती है तब न्याय के प्रति असमानता बढ़ती है। इसलिए संतुलन जरूरी है।

आइए अब "गरीब और अमीर, दुनिया में दो ही जाति और धर्म" विषय पर और गहराई से विचार करें.....

गरीबी का चक्र कैसे टूटता है ? 

पहले परिवार में शिक्षा, फिर अच्छा स्वास्थ्य, फिर अच्छा काम, फिर बचत और निवेश। यह चक्र शुरू करने के लिए शुरुआती मदद जरूरी है। सरकारें, एनजीओ और समाज मिलकर यह मदद दे सकते हैं।

अमीरों की जिम्मेदारी क्या है ?

सिर्फ दान नहीं, बल्कि सिस्टम में बदलाव लाना। वे नीति-निर्माण में अपनी आवाज इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि कानून गरीबों के पक्ष में हों। वे अपने बिजनेस में गरीबों को रोजगार दें, उन्हें स्किल्स सिखाएं।

सभी की ईमानदारी से सामूहिक भूमिका है कि सकारात्मकता की मानसिकता के साथ मिल कर आगे कदम बढ़ाए। साथ ही आज भी चले आ रहे सदियों से स्थापित उन सामाजिक मापदंडों को जड़ से खत्म करने का आधार बनाए जिनकी वजह से अमीर और गरीब के बीच खाई पैदा होती है 

लेख का लब्बोलुआब यह है कि इस वैश्विक सामाजिक कलंक से उबरने के लिए सब मिल कर काम करें।

  • गरीबों की जिम्मेदारी है कि वे हार न मानें। सीखते रहें, मेहनत करते रहें और एकजुट रहें। एक अकेला व्यक्ति कमजोर है, लेकिन हजारों मिलकर ताकतवर।
  • बच्चों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दें। बच्चे भविष्य हैं। अगर हम आज के गरीब बच्चों को अच्छा भविष्य दें तो कल का समाज बेहतर होगा। स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई नहीं, जीवन कौशल, नैतिकता और सहानुभूति भी सिखानी चाहिए।
  • महिलाओं की भूमिका बहुत बड़ी है। जहां महिलाएं शिक्षित होती हैं, वहां पूरा परिवार उन्नति करता है। गरीब महिलाओं को सशक्त बनाना इस लड़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • पर्यावरण संरक्षण भी गरीबी कम करने से जुड़ा है। साफ पानी, साफ हवा और अच्छी फसलें गरीबों को मजबूत बनाती हैं। अमीर लोग संसाधनों का दुरुपयोग न करें, ताकि सबके लिए पर्याप्त हो।
  • संस्कृति और कला भी इस फर्क को पाटने में मदद कर सकती हैं। कहानियां, गाने, फिल्में जो अमीर-गरीब के बीच समझ पैदा करें, वे समाज को जोड़ती हैं।

यह याद रखें कि हम सभी इंसान हैं। हमारा खून एक है, हमारी सांस एक है। गरीब और अमीर का फर्क हमने बनाया है, हम ही मिटा सकते हैं। आइए मिलकर एक ऐसी दुनिया बनाएं जहां हर कोई गरिमापूर्ण जीवन जी सके। जहां न कोई भूखा सोए, न कोई अकेला महसूस करे। जहां शिक्षा और अवसर सबके लिए हों। जहां इंसानियत सबसे बड़ा धर्म बने।

यह लेख सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि एक पुकार है। हर पढ़ने वाले से अपील है कि वह इस दिशा में एक छोटा कदम उठाए। चाहे वह एक बच्चे को पढ़ाने का हो, किसी गरीब को मदद करने का हो या अपनी सोच बदलने का हो। स्वामी विवेकानंद जी के मूल सैद्धांतिक विचार कि, "अपने में सुधार, देश की सबसे बड़ी सेवा है", आज समीचीन है।

अंत में.... दुनिया बदल सकती है। अगर हम चाहें तो जरूर बदल सकती है। गरीब और अमीर के बीच की दीवार गिर सकती है। बस हमें इंसानियत की रोशनी जलानी होगी....🙏

लेखक मनोज भट्ट, कानपुर "सामाजिक ताना-बाना"
-------------------------------------------------------
ब्लॉग वेबसाइट: www.samajiktanabana.in ईमेल: manojbhatt@samajiktanabana.in

"सामाजिक ताना-बाना" हम और आप ही हैं। मेरे इन विचारों पर आपकी क्या राय है ? कृपया अपनी प्रतिक्रिया ज़रूर साझा करें। यदि यह लेख आपको सार्थक लगा हो, तो इसे अपनों के साथ साझा करना न भूलें। धन्यवाद। 🙏

टिप्पणियाँ