शिक्षा बनाम अंधविश्वास... एक वैचारिक युद्ध
आधुनिक युग में शिक्षा , विज्ञान और अंधविश्वास का द्वंद्व... उजाले में पसरता अंधेरा मानव सभ्यता के इतिहास का यदि सूक्ष्म अवलोकन किया जाए , तो यह स्पष्ट होता है कि आदिम काल से लेकर आज के इक्कीसवीं सदी के इस दौर तक , मनुष्य ने वैचारिक और भौतिक रूप से एक लंबी दूरी तय की है । कभी पत्थरों को आपस में रगड़कर आग जलाने वाला इंसान आज अंतरिक्ष की गहराइयों को नाप रहा है , कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ) के सहारे भविष्य की रूपरेखा तैयार कर रहा है , और सूक्ष्म से सूक्ष्म जीवाणुओं की संरचना को समझकर असाध्य रोगों पर विजय प्राप्त कर रहा है । शिक्षा का प्रसार समाज के उस अंतिम छोर तक पहुँच चुका है जिसे कभी मुख्यधारा से पूरी तरह अलग मान लिया गया था । चाहे वह सुदूर गाँवों के प्राथमिक विद्यालय हों या महानगरों के तकनीकी संस्थान , ज्ञान की गंगा हर दिशा में बह रही है । परंतु , इस चमकते हुए तकनीकी और शैक्षिक परिदृश्य के समानांतर एक ऐसा स...