"गरीब और अमीर", दुनिया में दो ही जाति और धर्म
"गरीब और अमीर", दुनिया में दो ही जाति और धर्म.... आज की दुनिया में बस, दो ही जाति और धरम ! नए नजरिए से देखिए, तो दूर हो जाएगा भरम !! अपना परंपरागत रूढ़िवादी चश्मा उतार कर फेंक दीजिए और नए सिरे से, नए नजरिए का साफ चश्मा पहन कर अपने अगल बगल से लेकर दुनिया भर को देखिए तो आपको मेरी उपरोक्त दो पंक्तियों का संदेश स्पष्ट दिखने लगेगा। यदि अभी भी कुछ धुंधला दिख रहा है, तो पूरा लेख अवश्य पढ़ें... दरअसल दुनिया भर का मानव समाज अनगिनत जातियों, धर्म, भाषाओं और रंगबिरंगी संस्कृतियों से भरा हुआ हैं। लोग अलग-अलग देशों में रहते हैं, अलग-अलग रीति-रिवाजों को मानते हैं। लेकिन अगर हम गहराई से देखें तो सच्चाई यह है कि मानव समाज वास्तव में सिर्फ दो हिस्सों में बंटा हुआ है, गरीब और अमीर। यह विभाजन न किसी देश की सीमा से जुड़ा है, न किसी रंग या भाषा से। यह वह रेखा है जो हर इंसान के जीवन को सबसे गहरे स्तर पर छूती है। यह लेख इसी सच्चाई को सरल शब्दों में समझाने की कोशिश करता है। हम देखेंगे कि यह फर्क क्या है, यह कैसे पैदा होता है, इसका असर क्या है और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न ये है कि इसे कैसे मिटाया जा ...