प्रार्थना से कर्म तक: समाज और बच्चों का भविष्य
प्रार्थना और सपना: एक ईश्वरीय संवाद... एक शीतकालीन रात्रि में चारों ओर गहरा सन्नाटा, स्थिरता और मौन का साम्राज्य फैला हुआ था। किन्तु एक व्यक्ति, जो समाज का सामान्य-सा सदस्य था, अपने घर के छोटे से कक्ष में बेचैन होकर करवटें बदल रहा था। नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी। उसकी आत्मा भीतर ही भीतर किसी उत्तर की खोज में भटक रही थी। वह सोच रहा था कि "आखिर कब उसकी प्रार्थनाएँ पूरी होंगी। क्योंकि वह अपने देश की दिन पर दिन बढ़ती अराजक व्यक्स्था से दुखी था। वह प्रतिदिन ईश्वर से विनती करता कि हे ईश्वर !इस धरती पर एक ऐसा बालक जन्म ले, जो मेरे देश को गौरव प्रदान करे, जो अराजकता, अज्ञान और अन्याय के अंधकार को चीरकर सूर्य की तरह इस देश को विश्व में सर्वोच्च पायदान पर प्रतिष्ठित करे। परंतु अभी तक उसको कहीं भी ऐसा बालक नहीं दिखा जो समाज ओर देश को नया मजबूत धरातल दे सके।" धीरे-धीरे उसकी पलकों पर नींद का बोझ उतर आया। उसी पल एक अद्भुत स्वप्न ने उसकी चेतना को अपने वश में कर लिया। स्वप्...