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जब एक लड़की आगे बढ़ती है…

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जब एक लड़की आगे बढ़ती है… श्रृंखला: लड़कियों की किशोरावस्था-- भाग 12 (अंतिम) किशोरियों की समझ, साहस और सपनों की यात्रा यह अंत नहीं, आरंभ है पिछले ग्यारह भागों में हम लोग एक लंबी यात्रा पर साथ चले। हमने लड़कियों की किशोरावस्था के सवालों से शुरुआत की, पहचान की खोज की, घर से संवाद सीखा, समाज की निगाहों को समझा, शिक्षा-डिजिटल दुनिया-भावनाओं-पैसे-असफलता और सपनों पर बात की।  अब हम उस मोड़ पर हैं जहाँ से रास्ता दो हिस्सों में बंटता है, एक रास्ता पीछे ले जाता है, 'पहले जैसा' बनने की ओर। दूसरा रास्ता आगे ले जाता है, 'अपने जैसा' बनने की ओर। यह बारहवाँ भाग कोई निष्कर्ष नहीं है। यह एक घोषणा है। घोषणा इस बात की कि जब एक किशोरी अपने भीतर के डर, दुविधा और दबाव को पार करके एक कदम आगे बढ़ाती है, तो वह सिर्फ अपना जीवन ही नहीं बदलती बल्कि वह अपने घर की हवा बदलती है, अपने मोहल्ले की सोच बदलती है और धीरे-धीरे पूरे समाज का ताना-बाना बदल देती है। इस भाग में हम पीछे मुड़कर नहीं देखेंगे। हम यह नहीं दोहराएंगे कि किशोरावस्था क्या होती है या '...

सपने : छोटे हों या बड़े, अपने हों

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सपने : छोटे हों या बड़े, अपने हों ( श्रृंखला: लड़कियों की किशोरावस्था - भाग 11 ) किशोरियों की समझ, साहस और सपनों की यात्रा...  सपना, जो सिर्फ तुम्हारा है किशोरावस्था की दहलीज़ पर खड़ी हर लड़की के मन में स्वाभाविक सा एक सवाल कुलबुलाता है,“मैं बड़ी होकर क्या बनूँगी ?” यह सवाल सिर्फ करियर का नहीं होता है। यह पहचान का सवाल होता है। यह उस आवाज़ का सवाल है जो भीतर से कहती है, “मैं भी कुछ कर सकती हूँ, कुछ बन सकती हूँ।“ पिछले दस भागों में हमने किशोरावस्था के भ्रम, पहचान, संवाद, समाज, शिक्षा, डिजिटल दुनिया, भावनाओं, सीमाओं, पैसे और असफलता पर बात की। अब हम उस धागे को पकड़ते हैं जो इन सबको एक माला में पिरोता है,"तुम्हारा सपना"। सपना कोई लग्ज़री नहीं है। यह तुम्हारी ज़रूरत है। जैसे शरीर को साँस चाहिए, वैसे ही मन को दिशा चाहिए। और यही सपना ही तुम्हे दिशा देता है । लेख श्रृंखला का यह 11वाँ भाग तुम्हें यह नहीं बताएगा कि डॉक्टर बनो या टीचर। यह भाग तुम्हें यह बताएगा कि जो भी बनो, वह ‘तुम्हारा’ चुना हुआ हो। किसी के दबाव का नहीं, किसी की नकल का नहीं, किसी डर का नहीं। 1. ‘अनुम...