मानवता के भविष्य की खोज
मानवता के भविष्य की खोज बिखरता ताना-बाना.... वो सुनहरे धागे , जो अब कहीं खो गए से लगते हैं... किसी भी समाज का निर्माण ईंट और पत्थरों से नहीं , बल्कि इंसानी भावनाओं , विश्वास और एक - दूसरे के प्रति समर्पण से होता है । एक समय था जब हमारे मानवीय समाज के ताने - बाने की बुनावट बेहद खूबसूरत और मजबूत हुआ करती थी । अगर हम कुछ दशक पीछे मुड़कर देखें , तो हमें एक ऐसा समाज नजर आता है , जिसकी नींव में आधुनिकता की चकाचौंध भले ही न हो , लेकिन मानवीय संवेदनाओं की गहराई अथाह थी । कल का वो समाज , जिसे हमने पीछे छोड़ दिया... तब अधिकांश घरों में ताले नहीं होते थे , बल्कि लोगों के दिलों में एक - दूसरे की सुरक्षा के प्रति, कर्तव्य वाली सोंच की जगह हुआ करती थी । जीवन में आज जैसी भागदौड़ और ' गलाकाट प्रतियोगिता ' नहीं थी । सफलता का पैमाना यह नहीं था कि आपने कितने लोगों को पीछे छोड़ा , बल्कि यह था कि आपने कितने लोगों को साथ लेकर चले । और ...