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डिजिटल दुनिया और किशोरियाँ : सोशल मीडिया का प्रभाव और सावधानियाँ

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स्वार्थ और लालच से बिखरता सामाजिक ताना-बाना:

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  स्वार्थ और लालच से बिखरता सामाजिक ताना-बाना... वर्तमान की चुनौती और आगामी पीढ़ी की विरासत... आज का युग भौतिक सुख-सुविधाओं का युग है। हर तरफ चमक-दमक, तेज गति, तुरंत सफलता और कम से कम मेहनत में अधिक से अधिक हैसियत पाने की होड़ मची हुई है। लेकिन इसी होड़ ने हमारे सामाजिक ताने-बाने को चुपचाप चीरना शुरू कर दिया है।  जहां एक समय परिवार, समाज और राष्ट्र एक-दूसरे के सहारे खड़े थे, वहां आज स्वार्थ और लालच की दीवारें हर संबंध को अलग-अलग कर रही हैं। यह कोई अचानक आई आपदा नहीं है। यह धीरे-धीरे, लगभग अनदेखी तरीके से फैल रही एक महामारी है जिसका नाम है – लालच और स्वार्थ... हम भौतिकवाद की चकाचौंध में इतने खो गए हैं कि भविष्य की पीढ़ी क्या विरासत पाएगी, इसकी चिंता हमें छू तक नहीं रही। हम अपने लालच में इतने अंधे हो चुके हैं कि परिवार टूट रहा है, दोस्ती बिक रही है, समाज का विश्वास डगमगा रहा है और देश की नैतिक नींव हिल रही है।  यह लेख इसी टूटते सामाजिक ढांचे की पड़ताल करता है, उसके कारण, उसके वर्तमान स्वरूप, उसके दूरगामी परिणाम और सबसे महत्वपूर्ण, हम क्या कर सकते हैं ताकि हम अपनी आने वाली प...

डिग्री नहीं, समझ चाहिए : लड़कियों की शिक्षा की सच्चाई.... लड़कियों की किशोरावस्था...भाग 5

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  शिक्षा : डिग्री से आगे की समझ... लड़कियों की किशोरावस्था...भाग 5 “शिक्षा वह प्रकाश है जो डिग्री नहीं, बल्कि समझ, आत्मविश्वास और स्वतंत्र निर्णय की शक्ति देता है।” किशोरावस्था में सपने करियर की आकृति लेने लगते हैं। लेकिन लड़कियों के लिए शिक्षा अक्सर डिग्री तक सिमट कर रह जाती है। डिग्री का एक ऐसा कागज जो शादी के बाजार में मूल्य तो बढ़ाए, लेकिन जीवन की असली राह न दिखाए। यह भाग श्रृंखला का पाँचवाँ पड़ाव है, जहाँ हम किशोरियों की शिक्षा के असली अर्थ पर गहराई से बात करेंगे, डिग्री से आगे की समझ, करियर बनाम रुचि का द्वंद्व, सामाजिक भ्रम, और ग्रामीण-शहरी संदर्भ। पिछले भागों में हमने किशोरावस्था के सवाल (भाग 1), पहचान (भाग 2), घरेलू संवाद (भाग 3), और समाज की निगाहें (भाग 4) पर चर्चा की। अब हम स्कूल-कॉलेज की दुनिया में प्रवेश करते हैं,जहाँ शिक्षा मुक्ति का माध्यम बन सकती है या अपेक्षाओं का नया बोझ। “सामाजिक ताना-बाना” मानता है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन की समझ है। लड़कियों को डिग्री मिले, लेकिन समझ न मिले, तो शिक्षा अधूरी रह जाती है। आइए, इस यात्रा पर चलें। 1....

बुढ़ापे में प्यार: मेरे 60 साल के पिता की दूसरी शादी की भावुक दास्ताँ

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पिता जी की शादी : हास्य सफर, भावनाओं के साथ आज का दिन मेरे जीवन का सबसे अजीब, सबसे मजेदार और सबसे भावुक दिन था। मेरे पिता जी, जो 60 साल के हो चुके हैं, आज शादी कर रहे थे। हाँ, आपने सही सुना, शादी! और मैं, उनका 40 साल का बेटा, बारात में सबसे आगे खड़ा था, घोड़ी पर चढ़े पिता जी को देखकर सोच रहा था कि कहीं यह सपना तो नहीं।  मेरी माँ, जिन्हें मैं कभी जान नहीं पाया, मेरे जन्म के साथ ही इस दुनिया से चली गई थीं। पिता जी ने मुझे अकेले पाला, बड़ा किया और अब वे अपने बुढ़ापे का सहारा ढूंढ रहे थे। नई माता जी आ रही थीं, और पूरा परिवार उनकी खुशी में शामिल था। लेकिन मेरे मन में क्या चल रहा था ?  चलिए, मैं आपको पूरी कहानी सुनाता हूँ, एक ऐसी कहानी जो हँसी से शुरू होती है, भावनाओं में डूबती है, और फिर हँसी के साथ खत्म होती है। यह हास्य रचना 3000 शब्दों से ज्यादा की है, तो चाय की प्याली थामिए और तैयार हो जाइए एक रोलरकोस्टर राइड के लिए! जोर का झटका, धीरे से – जब पिता जी ने ऐलान किया सब कुछ उस दिन शुरू हुआ जब मैं ऑफिस से घर लौटा। मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ, 40 की उम्र में भी सिंगल, और घर में पित...