फौजी: जीते जी उपेक्षा, शहादत पर श्रद्धांजलि
फौजी: जीते जी उपेक्षा, शहादत पर श्रद्धांजलि एक कठोर सत्य और चिंतन जब कोई फौजी शहीद होता है, तो पूरा देश एक स्वर में उसकी वीरगति पर श्रद्धांजलि अर्पित करता है। तिरंगे में लिपटी उसकी देह पर फूल बरसाए जाते हैं, सड़कें बंद हो जाती हैं, सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट्स वायरल होते हैं, नेता मंच से भाषण देते हैं, और स्कूलों में बच्चे “सैनिक हमारा गौरव है”,"जय जवान जय किसान" जैसे नारे लगाते हैं। लेकिन असलियत ये है कि किसान और जवान के अपने परिवार के अंदर चल रही रोजमर्रा के जीवन की परेशानियों से समाज में किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता और ऐसे में उनकी कितनी जय है, ये भी सब जानते हैं। क्या हमने कभी ठहरकर यह सोचा है कि जब वही फौजी अपनी वर्दी में सांस लेता हुआ, अपने परिवार के साथ होता है, तब समाज उसके साथ क्या व्यवहार करता है ? क्या उसे या उसके परिवार को वह सम्मान, वह सहानुभूति और वह सहयोग मिलता है, जिसका वह वाकई हकदार है ? लेकिन वहीं उसकी शहादत की खबर सुनते ही क्षणिक भीड़ अचानक उमड़ पड़ती है। क्यों...? यह प्रश्न दुखद है, लेकिन जरूरी है। यह हमारी सामाजिक चेतना की परीक्षा है। यह लेख केवल ए...