मुखौटों का बाजार
मुखौटों का बाजार इंसानी समाज में मुखौटों का बाजार हम सब बाजार जाते हैं, दुकानों पर सामान देखते हैं, पर एक बाजार ऐसा भी है जो दिखता नहीं, पर हर गली, हर मोहल्ले, हर ऑफिस, हर सोशल मीडिया की स्क्रीन पर लगा हुआ है। वह है, इंसान द्वारा पहने गए "मुखौटों का बाजार" और यह बाजार दिन पर दिन महंगा होता जा रहा है। यहां तक कि आज के पूरे विश्व में सबसे बड़ा बाजार यदि किसी चीज का गर्म है, तो वह है "मुखौटों का बाजार"। विभिन्न प्रकार के मुखौटे और उनकी कीमत आज समाज में लगभग हर इंसान तरह तरह के मुखौटे लगाए हुए है। लोगो की असलियत को जो मुखौटा सफलता पूर्वक सबसे ज्यादा और दीर्घकालिक छुपा देता है, उसकी कीमत सबसे अधिक होती है। कुछ मुखौटे ज्यादा दिन तक असलियत नहीं ढक पाते हैं, स्वाभाविक रूप से उसकी कीमत कम होगी। एक मुखौटा पारदर्शी होता है, जिसकी कीमत नकारात्मक में चली जाती है। ऐसे मुखौटे पहले ही दिन से इंसान की असलियत को ढक पाने में असमर्थ होते हैं। इसका अर्थ ये है कि जो इंसान अपनी असलियत को छुपाने के लिए जितना अच्छा मुखौटा लगायेगा, समाज में उसक...