सास-बहू संबंध और बेटियों की परवरिश : रिश्तों की जड़ों में छिपा सामाजिक सच
सास-बहू संबंध और बेटियों की परवरिश रिश्तों की जड़ों में छिपा सामाजिक सच क्या कभी आपने सोचा है जो बच्चियां, जो बेटियां अपने घर में, शादी से पूर्व तमाम खूबियों से परिपूर्ण, घर की रौनक, घर में खुशहाल माहौल बनाने वाली और सब की प्यारी दुलारी होती हैं, वही जब शादी के बाद अपने ससुराल में जाती हैं तो अचानक वहां से उनकी तमाम कमियां और शिकायतें बताई जाने लगती हैं। हमारी सामाजिक परंपरा के अनुसार, बेटी को लड़के के माता पिता और अन्य परिवारीजन बारात लेकर उसे ब्याह कर अपने घर लाते हैं और उसे अपने परिवार के साथ जोड़ते हुए उसका पूरे समाज के सामने स्वागत करते हैं। लड़के का परिवार भरापूरा तो पहले से ही वहीं था, किंतु बेटी के लिए ससुराल, एक अंजान और नई दुनिया की तरह होती है। ऐसे में ससुराल वालों की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है कि उस बेटी को, जो अपने माता पिता, भाई बहन सब छोड़ कर ससुराल आई है, उसे ससुराल परिवार में सब मिल कर भावनात्मक रूप से ऐसा माहौल दें कि वह जल्दी ही नए परिवेश में, अपने आप को समाहित कर ले। उसे न केवल क्रमशः अपनाए बल्कि उसे महसूस भी कराए। लेकिन दुर्भा...